यह कहानी शुरू होती है 1009 में जो एक महान शूरवीर योद्धा का बहराइच में जन्म होता है ,जिसका नाम महाराजा सुहेलदेव भर था, इतिहास के पन्नों में दबा पड़ा था, और वह भर भारशिव महाराजा जो इस भारत भूमि की धरा पर ऐसा दहशत 300 वर्षों तक फैलाया कि किसी भी विदेशी मलेछो की हिम्मत नहीं हुई ,भारतवर्ष में आंख उठा कर देखने की, और उस वीर पुरुष का नाम महाराजा सुहेलदेव राजभर था, तो आइए जानते हैं इनकी इतिहासिक तथ्यों पर एक नजर, भर भारशिव राजभर क्षत्रिय महाराजा सुहेलदेव राजभर की कहानी....
बहराइच यू तो उत्तरप्रदेश के मानचित्र में अपनी एक अलग स्थान बनाई हुई है परंतु बहराइच के इतिहास पर यदि प्रकाश डाले तो अनगिनत कहानियों का भरमार नज़र आएगा।बहराइच का पुराना नाम भर राइच था जो कि बहराइच के कि चकदा डीह के महाराजा सुहेलदेव राजभर जी के नाम पर पड़ा। बहराइच भरो की राजधानी थी,
राजा सुहेलदेव एक प्रतापी वीर शक्तिशाली राष्ट्र नायक सामंत महाराजा थे ।जो हमेशा राज्य व प्रजा हित के लिए काम करते थे।राजा सुहेलदेव राजभर का जन्म 1009 इसवी में बसंत पंचमी के दिन श्रावस्ती में हुआ था।महाराजा सुहेलदेव राजभर के पिता भी एक बहुत सुरवीर योद्धा थे,
इनके पिताजी का नाम बिहारीमल भर व माताजी का नाम महारानी जयलक्ष्मी भर था।
18 वर्ष की कम उम्र में ही 1027 इसवी में उनका राजतिलक कर दिया गया था ।राजा सुहेलदेव भर एक कुशल धनुषभेदक व तलवार युद्ध में निपुण थे।लगभग 50 वर्षो तक करीब 1027 से 1077 तक उनका शाशन रहा है ।महाराजा सुहेलदेव बालार्क ऋषि महात्मा को अपना गुरु मानते थे ।जो बहराइच से लगभग तीन कीलोमीटर उत्तर की ओर एक विशाल सूर्यकुंड व भव्य सूर्यमंदिर था ।राजा सुहेलदेव राजभर और बहराइच का परस्पर सम्मिलन है।यह युद्ध राजा सुहेल देव व महमूद गजनवी का भांजा और अरब के लूटेरा व मुस्लिम शाशक सैय्यद सालार मसूद गाज़ी जो उत्तर भारत को कुचलता और रौंदते हुए 11वी शताब्दी में बहराइच आ पहुचा था, राजा सुहेलदेव राजभर ने अपना आक्रामक और तेजस्वी रूप दिखाते हुए अपने तीर से मसूद गाज़ी को मार गिराया। और अपना भरताज कायम रखा।यह लड़ाई महाभारत से कम नहीं थी ,चाटुकारो ने भरों को प्रास्त करने के लिए युद्ध क्षेत्र में गाय छोड़े थे ताकि भरों को आसानी से मारा जा सके लेकिन महाराजा सुहेलदेव राजभर चतुर शासक थे, सभी भर राजा एकत्रित हुए और राजा सुहेलदेव का साथ दिये, विदेशी हमलावरों को गाजर मूली की तरह काट गिराया था, और जिसने यहां की बहन बेटियों की इज्जत बचाया ,यहां की संस्कृति सभ्यता को कायम रखा लोग उसे कैसे भुला दिये,
सैयद सालार गाजी को
हालांकि उसको जहा दफन किया गया, वह आज अब दरगाह हो गयी है जिसको 300 साल बाद मुगल सम्राट फ़िरोज़ तुगलक ने बनवाया था।सुहेलदेव के बारे में कई किताबो में उल्लेख मिलता है जैसे जैन धर्म के शाशक, बहराइच गजेटियर,अन्धकारयुगीन भारत, आईने मसूदी, भर भारशिव राजाओं ने इस भारतवर्ष को एक ऐसी पहचान दिया है जिसे भूल पाना भारत वासियों के लिए कल्पित है, महान है वह समाज जो इस देश के लिए लड़ा और आज दर-दर की ठोकरें खा रहा है यह समाज हमेशा विदेशी हमलावरों से लड़ते रहे, लड़ते-लड़ते देश के लिए सब कुछ खो दिया
कहा जाता है कि भरों में इस देश के चिराग जलाने के लिए ,अपने घर का चिराग बुझा दिया
भरो आगे बढ़ो, अपने अस्तित्व को, स्वाभिमान को पहचानो और लोगों को बता दो इस देश के सबसे वीर क्षत्रिय हमही हैं
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