भर राजा रामकरन का जबरदस्त इतिहास

 भारशिव भर नागवंशी क्षत्रिय सम्राट

भर राजा  रामकरन



 (13 वीं सदी) ग्राम गढ़ा, परगना एकदाला, तहसील खागा, जिला फतेहपुर गढ़ा ग्राम इस जनपद का सबसे बड़ा गाव है। यह ग्राम 25,35'उत्तरी अक्षांश और 89,2पूर्वी देशांतर के मध्य यमुना नदी के वाए तट पर खागा तहसील से 19k,m, दक्षिण ग्राम राजधानी से 3k,m दूरी पर स्थित है। कहा जाता है कि इस ग्राम का नाम गढ़ा यहां के भर राजा ram करन का यहां गढ़ (किला) होने के कारण गढ़ा पड़ा। बहुत पहले भर राजा का यह किला मौके पर मौजूद था परन्तु पठानों द्वारा यह किला ध्वस्त कर दिया गया। वर्तमान में इस ऐतिहासिक गाव मे ऐतिहासिक महत्व का कुछ भी अवशेष नहीं है। गढ़ा गाव 1906 ईसवी में इतना बड़ा था कि इस ग्राम में 35 पुरवा थे।(सन्दर्भ ग्रन्थ जिला गजेटियर फतेहपुर (1906) पेज 211 लेखक एच आर नेविल) ग्राम गढ़ा के पश्चिम यमुना नदी, पूरब कछार, उत्तर तिहार और दक्षिण चंदापुर ग्राम स्थित है। स्थानीय किंवदंतियों में प्रचलित है कि 13 वीं सदी में जब अलाउद्दीन ख़िलजी ने कोट किला के भर राजा कैलाश के राज्य पर आक्रमण किया तो उस समय गढ़ा के राजा राम करन जो भर राजा कैलाश के परम मित्र थे, ने भर राजा कैलाश के तरफ़ से युद्ध में भाग लिए थे। उस युद्ध में भर राजा कैलाश वीरगति को प्राप्त हो गए थे। उस युद्ध में अपार जनधन की हानि होने के कारण वहां की सत्ता पठानों को सौंप कर सेना वापस दिल्ली चली गई थी। इन पठानों के गुप्तचर के रूप में काम करने वाले अन्य मुस्लिम राजा करन के किले के इर्द गिर्द पुरवो में बसने लगे। राज्य की गोपनीय जानकारी पठान बन्धुओं के माध्यम से सुल्तान अलाउद्दीन को मिलने लगी। अलाउद्दीन खिलजी के लुट पाट और हिन्दू राजाओं को जबरन इस्लाम कबूल करवाने से भर राजा ram करन बहुत नाराज़ थे। अब अपने राज्य में मुस्लिमो के बसने से चिंतित हो गए। उन्हे येन केन अपने राज्य से बाहर निकालने का दबाव बनाने लगे। कोट के पठान बन्धुओं के माध्यम से सुल्तान अलाउद्दीन को यह सूचना दी गई। सुलतान ने कहा समय का इंतजार करिए उचित समय पर कार्यवाही करेंगे। एक दिन भोर(प्रातः ) में जब तमाम भर सैनिक सो रहे थे, कुछ जो सवेरे जग जाते थे, नित्य क्रिया से निपट रहे थे। कुछ व्यायाम शाला में दंड कसरत मार रहे थे कि उसी समय सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के सैनिकों ने और पठानों ने भर राजा ram करन के किला गढ़ा पर आक्रमण कर दिया। भर राजा और उनके सैनिक इस आकस्मिक आक्रमण से अचंभित हो गए। भर सैनिक जो जहां थे, वहीं से महल और शस्त्रागार की तरफ दौड़े। परंतु आकस्मिक आक्रमण ने भर सैनिकों को संभलने का मौका नहीं मिला। जो जहां थे वहीं से युद्ध भूमि की तरफ दौड़े दुश्मनों से लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए। भर राजा ram करन भी युद्ध भूमि लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुए। राजपरिवार के अन्य बूढे, बच्चे, महिलाएं आदि नाव से यमुना नदी को पार करके जिला हम्मीरपुर की तरफ पलायन कर गए। पठानों ने किले पर कब्जा ही नहीं किया बल्कि बल्कि किले को तहस नहस कर जमीदोज करके उसका नमो निशान मिटा दिया। क्योंकि प्राय भरों के वंशजअपनी सत्ता वापस पाने के लिए संगठित होकर पुनः आक्रमण कर दिया करते थे।   *************************राम चन्द्र राव गोरखपुर

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