डीह बाबा भर जाति से हैं




सप्तमी के बच्चे 🏇🏼🏇🏼

   ••••••••डीह बाबा••••••••

(लेखक:महा पण्डित राहुल सांकृत्यायन)

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जीता भर जाति के थे।

कौन सी भर जाति?

भर क्षत्रिय जाति:~ईसा से प्रायः (पहले) २०००वर्ष पूर्व, जब आर्य भारत आये , तब से हजारों वर्ष पूर्व, जो जाति सभ्यता के उच्च शिखर (श्रेष्ठ) पर पहुंच चुकी थी, सुख और स्वच्छता युक्त हजारों भव्य प्रसादोंवाले(पूजा पाठ करने के बाद बाटने वाले प्रसाद) एवम सुदृढ़ (बहुत मजबूत) नगर बसायें थे। और उस समय भर जाति के लोग समुद्री जहाज से, इनका दूर दूर तक व्यवसाय का काम चलता था।

आर्यों ने व्यसननिमग्न (बुरी आदत के लत में लीन जैसे,मदिरा पान करके उसी मे लीन रहना) का फायदा उठाकर उनके सैकड़ों नगरों को ध्वस्त कर दिया। तो भी उनके नाम की छाप (छापने की क्रिया अर्थात उनके द्वारा किये गये महान कार्य) आज भी भारत जैसे देश के नाम में छिपा है।


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राहुल संकृत्यान जी लिखते हैं कि ये वही भरतजाति या भरजाति है जो पराजित हो जाने के बाद भी भरत जाति ने आर्यों को सभ्यता सीखाने में गुरु का सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया। भारत में ऐसे अनेक दृष्टांत(निश्चित एवम् प्रामाणिक) हैं, पराजित सभ्य जाति (भर) विजेता, असभ्य जाति (आर्य) को अपनी सभ्यता द्वारा पराजित करने में सफल रही।


***************सिंधु घाटी ****************


सिंधु की उपत्यका ( घाटी या तराई):~


जहां भरत जाति और आर्यों का संघर्ष हुआ। वहां भी सैकड़ों वर्ष पहले भर जाति शासन वाणिज्य (युद्ध) कला कौशल (लड़ने में प्रशिक्षण) सिखाती थी और दासवृत्य (निर्धन व्यक्ति का भरण पोषण) करते हुए सिंधु घाटी में बसी रही ।

सभ्य बन जाने के बाद (आर्य) डीलडौल , गोरे रंग, लम्बी खोपड़ी और नीली आंखों, भूरे बाल वाले आर्यों को ये श्याम वर्ण, चिपटी नाकों और खर्वकाय वाले बुरे लगने लगे। बढ़ती हुई जनसंख्या, पास पड़ोस में रहने सतती में वर्णसंकर्ता और आर्थिक प्रतिद्वंदिता वें बाते थी, जिनके कारण आर्य सिंधु घाटी से उन्हें निकालने पर मजबूर हुये। धीरे धीरे भरत जाति/भर जाति पश्चिम से पूर्व की ओर हटने लगे और कुछ समय बाद धीरे धीरे आर्य भी पूर्व की ओर आने लगे । धीरे धीरे भर जाति अपनी भाषा छोड़ कर आर्यों की भाषा अपनाने , बोलने लगे लेकिन मित्राता की दीवार में दरारें बनी ही रही।

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