भर महाराजा अगिया वीर की पराक्रम गाथा.....



भारशिव नागवंश के अंतिम भर सम्राट वीरों के वीर अगिया वीर महाराजा थे, अगिया वीर महाराज के साम्राज्य का भी पतन होली के दिन हुआँ था, भारशिवों की राजधानी भदोही थी, अगिया वीर महाराज भदोही जिले के महराजगंज के सम्राट् थे,

अगिया वीर महाराज इतनें वीर और पराक्रमी सम्राट् थे कि इनको सामनें से हराना लोहे के चने चबानें जैसा था,इनको सामनें से हराना नामुमकिन था,


होली के दिन एक बहुत बड़े षड्यंत्र के तहत महाराजा डलदेव के किले से लेकर भारत देश के सभी भारशिव नागवंशी भर क्षत्रियों के साम्राज्य पर एक साथ धोखे से रात में मुसलमानों द्वारा बहुत बड़ा हमला किया गया ,

क्योकि होली के दिन भारशिव नागवंशी भर क्षत्रिय महाराजा और उनकि पूरी सैनिक अस्त्र-शस्त्र नहीं उठाते थें, इन्हीं कमजोरियों का लाभ उठाकर मुस्लिम आक्रांताओं द्वारा महाराजा डलदेव के साथ-साथ सभी भारशिव नागवंशी भर क्षत्रियों के साम्राज्य का पतन कर दिया गया, लेकिन अगिया वीर महाराजा दुश्मनों के हाथों मारे नहीं गयें ,

अगिया वीर महाराज स्वयं जमीदोष हो गयें ऐसे वीर प्रतापी शूरवीर वीरों के वीर अगिया वीर महाराजा को कोटि-कोटि सत्-सत् बारंम्बार नमन् बन्दन!! भर जाति के महाराजा यहाँ मुसलमानों के पैर नहीं जमनें देते थे,भरों के भय से दिल्ली तक की फौजें परेशान रहती थी,

अद्वितिय साहस,अदम्य उत्साह और देश भक्ति की भावना से भर क्षत्रियों नें कई शताब्दियों तक मुसलमानों से आक्रमण करते रहें और मुसलमानों के पैर भारत धरा पर जमनें नहीं दियें,मर गयें मीट गयें भारत माँ की रक्षा करते हुए,अपनी संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करते हुए लेकिन कभी भी मुसलमानों के सामनें नहीं झुके,धन्य हैं


ऐसे वीरों के वीर शूरवीर भर क्षत्रियों को जिन्होनें मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी संस्कृति सभ्यता की रक्षा के लिए अपनें प्राणों की आहुति दे दी और उसी तरह माँ धरती माँ अपनें शूरवीर पुत्रों की यादों को अपनें सिने से लगाकर अपनें आँचल में छुपाकर आज भी भारशिव नागवंशी भर क्षत्रियों की यादों को संयोग कर रखी हैं,

भारत के हर कोनें में 20से 25किलो मीटर की दूरी पर भारशिव नागवंशी भर क्षत्रियों के किला कोट खाई दरी हवेली , दुर्ग आज भी खण्डहर के रुप में विद्यमान है,भारशिव नागवंशी भर जाति का बलिदान अमर है,भर क्षत्रिय का बलिदान देश के लिए था,देश की रक्षा में अनगिनत बलिदान चढ़ानें वाली जातियों में भर क्षत्रिय प्रथम थें,,,हे!भारशिव नागवंश के भर क्षत्रियों अपनें आप को जानों अपनें आप को पहचानों,अपनें पूर्वजों का सम्मान करो,आपके पूर्वज महान थे,आप क्षत्रियों में सर्वश्रेष्ठ क्षत्रिय कुल के हैं,आपको लाल बाबू साहब की उपाधि आपके पूर्वजों से मिली है,

क्योंकि आपके पूर्वजों को लाल रंग से ज्यादा लगाव था,घोड़े लाल,किले लाल,भगवा ध्वजा,बसंती या भगवा पगड़ी,बसंती या भगवा गद्दी भारशिव नागवंशी क्षत्रिय राजाओं का राष्ट्रीय निशान था,,,जय भवानी!! जय भारशिव नागवंश!! जय भारशिव नागवंशी भर राजपूताना!!ओम् भारशिवाय् नमः!!हर-हर महादेव!!भारशिव नागवंशी क्षत्रिय महासभा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनोज राय!!

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