राजभरों को होली के दिन शोक मनाना चाहिए


अति सर्वत्र वर्जित है। अतः होली के जोश में होश न खोए।14वीं शदी में डलमऊ के राजमहल में राजभरो ने आज के दिन शराब और भांग पीने की हद्द पार कर दी थी।।

दुश्मनों ने लगभग 25 हजार सैनिकों के साथ साथ राजा डल के पूरे परिवार का सामूहिक कतल करके उनके राज्य पर कब्जा कर लिया था। इतनी बड़ी दर्दनाक और रक्त रंजित घटना भुला देना राजभर समाज का मानसिक दिवालियान नहीं है तो क्या है?

असल में राजभरो को ठोकर खाने और उसे भूल जाने की बीमारी है।
तभी तो दबंगो द्वारा लगातार 5 साल लतियाए जाने के बावजूद भी ले दे और पीकर उन्हीं दबंगो को वोट देते हैं।

अतीत की घटनाओं से सबक लेने वाला व्यक्ति ही आगे की दिशा निर्धारित कर उत्तरोत्तर उन्नति करता है।
दुर्भाग्य है कि राजभर समाज ने अतीत की घटनाओं से अब तक कोई सबक नहीं लिया

है।कुछ पियक्कड़ तो यह भी कहते हुए पाए जाते हैं कि अतीत की घटनाओं से मै बहुत ही व्यथित हूं इसीलिए तो_____-------------मुझे पीने का शौक नहीं पीता हूं गम भुलाने को। आप खुद बुद्धजीवी है...

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