जब जब आया बुलावा मातृ भूमि का
भारशिवो ने हथियार उठाया था।
देश की रक्षा करने हेतु सदैव
अपना खून बहाया था।
जो उठी तलवार और तीर कमान
तो थर थर दुश्मन काँपे थे।
चूक भरो से हुई नहीं
देश की पताका झुकी नहीं।
युद्ध में भी धर्म दिखाया जिसने
शस्त्रहीन को शरण में लाया था।
याद करो इतिहास को जब
विद्रोही भारत में छाए थे।
खड़ा अकेला हुआ भारशिव तब
देख चट्टाने भी कांपी थी।
काट के सारे दुश्मन को
भारतवर्ष बचाया था।
देख कर समय धरातल का
आज ये राजभर भी कहता है
तत्पर रहे हर पल बलिदान हेतु
वही क्षत्रिय कहलाता है
वीरों के वीर महादेव सुहेलदेव राजभर
जयशंकर सिंह भारशिव



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